अप्रैल के बाद हर महीने ऑटोमैटिक बदलेगा आपका बिजली का बिल, लगेगा झटका

By Team DoStudyOnline

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दोस्तों, नमस्ते! आजकल हर तरफ एक ही खबर घूम रही है – बिजली का बिल अब हर महीने बदलने वाला है। अप्रैल से शुरू होकर आपका मासिक बिल ऑटोमैटिक तरीके से ऊपर-नीचे हो सकता है।

सुनकर थोड़ा झटका लगा ना? मुझे भी लगा जब ये न्यूज पढ़ी। लेकिन चलिए, आज इसी पर थोड़ा डिटेल में बात करते हैं। मैंने थोड़ा रिसर्च किया है, लेटेस्ट रिपोर्ट्स देखी हैं,

और जो समझ आया वो आपके साथ शेयर कर रहा हूं। जैसा कि मैंने देखा है, ये पूरी तरह से झूठ नहीं है, लेकिन इतना भी डरावना नहीं जितना हेडलाइंस बना रही हैं।

पहले समझते हैं असल में क्या हो रहा है?

केंद्र सरकार ने जनवरी 2026 में ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 जारी किया है। ये अभी मसौदा है, पब्लिक से कमेंट्स मांगे गए हैं। इसका मकसद बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) को घाटे से बाहर निकालना है।

आप जानते ही हैं, ज्यादातर राज्य की डिस्कॉम्स सालों से लाल में चल रही हैं। राजनीतिक दबाव में टैरिफ नहीं बढ़ाते, सब्सिडी देते हैं, और बिजली खरीदने की लागत बढ़ती जाती है। नतीजा? तीन लाख करोड़ से ज्यादा का बकाया!

इस नीति में मुख्य बात ये है कि टैरिफ को इंडेक्स-लिंक्ड बनाया जाएगा। मतलब, महंगाई, कोयले की कीमत, या कोई तय इंडेक्स से जोड़ दिया जाएगा।

अगर राज्य का इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (जैसे UPERC, DERC वगैरह) समय पर नया टैरिफ ऑर्डर नहीं जारी करता, तो दरें अपने आप बढ़ जाएंगी – सालाना बेसिस पर।

लेकिन हेडलाइंस में “हर महीने” क्यों लिखा जा रहा है? क्योंकि नीति में ये भी कहा गया है कि बिजली खरीद की लागत (फ्यूल और पावर परचेज कॉस्ट) में उतार-चढ़ाव का ब्योरा हर महीने उपभोक्ताओं को दिया जाए।

और कई जगहों पर पहले से ही FPPCA या FPPAS (फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट) नाम से मासिक एडजस्टमेंट होता है। जैसे दिल्ली में DERC ने हाल ही में प्रपोज किया कि ये सरचार्ज हर महीने बिल में जोड़ा जा सकता है, लेकिन 10% से ज्यादा नहीं।

तो अप्रैल 2026 से क्या होगा? वित्त वर्ष 2026-27 (1 अप्रैल 2026 से) लागू होने पर ये इंडेक्स-लिंक्ड सिस्टम शुरू हो सकता है। अगर लागत बढ़ी तो बिल में एडजस्टमेंट आएगा – कभी-कभी मासिक, कभी सालाना। लेकिन हर महीने बड़ा झटका? वो इतना आसान नहीं।

अभी बिजली बिल कितना है? रियल नंबर्स देख लो

जनवरी 2026 के आसपास के डेटा से बात करें तो –

  • घरेलू उपभोक्ताओं के लिए औसत टैरिफ करीब 6.47 रुपये प्रति यूनिट है।
  • सप्लाई की असल लागत 6.82 रुपये यूनिट।
  • यानी अभी भी हर यूनिट पर थोड़ा घाटा है डिस्कॉम्स का।
  • औद्योगिक यूजर्स 10 रुपये यूनिट, कमर्शियल 10.49 रुपये तक दे रहे हैं।

अगर इंडेक्स से लिंक हुआ तो महंगाई 5-6% रही तो टैरिफ भी उसी हिसाब से बढ़ सकता है। लेकिन अगर कोयला सस्ता हुआ या रिन्यूएबल ज्यादा आया तो बिल घट भी सकता है। मेरी राय में, ज्यादातर मामलों में बढ़ोतरी ही होगी क्योंकि मांग तेजी से बढ़ रही है।

2032 तक बिजली की मांग दोगुनी होने वाली है। अभी क्षमता 509 गीगावॉट है, सालाना 4% ग्रोथ। घरेलू और कृषि में 45% बिजली सब्सिडी पर जाती है, जिससे इंडस्ट्री महंगी बिजली खरीदती है। ये क्रॉस-सब्सिडी भी धीरे-धीरे खत्म करने की बात है नीति में।

आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?

देखिए, अगर आप मिडिल क्लास फैमिली हैं, 200-300 यूनिट महीना यूज करते हैं, तो अभी बिल 1500-2500 के आसपास आता है। अगर 5-10% सालाना बढ़ोतरी हुई तो अगले साल 200-300 रुपये ज्यादा। लेकिन अगर FPPCA मासिक लगा तो छोटे-छोटे बदलाव हर बिल में दिखेंगे।

कुछ राज्य पहले से ही FPPCA लगा रहे हैं। जैसे कर्नाटक, उत्तराखंड, आंध्र में हर कुछ महीने में एडजस्टमेंट होता है। दिल्ली में नया प्रपोजल है कि 10% तक मासिक सरचार्ज बिना परमिशन जोड़ा जा सकता है।

तो झटका तो लगेगा, लेकिन अचानक 50% बढ़ोतरी जैसा नहीं। बस अब बिल फिक्स्ड नहीं रहेगा – थोड़ा अनप्रेडिक्टेबल हो जाएगा।

क्या करना चाहिए? मेरे कुछ टिप्स

  1. बिजली बचाओ – LED बल्ब, 5-स्टार AC-फ्रिज, टाइमर इस्तेमाल करो। 10% बचत से बिल में फर्क पड़ता है।
  2. सोलर लगवाओ अगर छत है – नेट मीटरिंग से बिल जीरो भी हो सकता है।
  3. बिल चेक करते रहो – हर महीने यूनिट और चार्जेस देखो, गलती हो तो शिकायत करो।
  4. सरकारी स्कीम्स देखो – PM सूर्य घर योजना से सब्सिडी मिल रही है सोलर पर।
  5. अपने राज्य के रेगुलेटर को फॉलो करो – कमेंट्स भेजो अगर नीति पसंद नहीं।

आपको क्या लगता है? ये नीति अच्छी है डिस्कॉम्स के लिए, या आम आदमी पर बोझ बढ़ाएगी? कमेंट में बताओ। देखते हैं आगे क्या होता है – अगर ये पास हुई तो अप्रैल 2026 से असर दिखना शुरू हो जाएगा।

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